राकेश उवाच : एक चिकित्सा मनोवैज्ञानिक की डायरी

उन व्यक्तियों और परिस्थितियों को समर्पित, जो इनमें सहभागी रहे एवं इन विचारों के प्रेरणा स्रोत हैं। -राकेश त्रिपाठी rakeshuvaach.blogspot.in

Saturday, September 3, 2016

जिस तरह जवानी चलती है, उस तरह बुढ़ापा होता है





Posted by Rakesh Tripathi "प्रियांश " at 1:30 AM No comments:
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Rakesh Tripathi "प्रियांश "
राकेश त्रिपाठी 'प्रियांश' के माता-पिता श्रीमती पारबती देवी और श्री राम राज त्रिपाठी हैं. हाईस्कूल और इंटरमीडिएट खैर इंडस्ट्रियल इन्टर कॉलेज, बस्ती जिला से; स्नातक मनोविज्ञान ऑनर्स, व स्नातकोत्तर मनोविज्ञान में, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से; एम.फिल. (चिकित्सा एवं समाज मनोविज्ञान) का प्रशिक्षण राँची इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूरोसायकैट्री एंड अलाइड साइंसेज (RINPAS), राँची विश्वविद्यालय से तथा पीएच.डी. की उपाधि किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय उ.प्र., लखनऊ से प्राप्त किया. अब तक ६० से अधिक शोधपत्र, पाँच अध्याय और तीन पुस्तकें (१.Cognitive Functioning: Determinant of Quality of Life of Urban Elderly; २.Usefulness of Haloperidol and Risperidone in BPSD: Comparative Study; ३.अनुभूतियाँ काव्य संग्रह) प्रकाशित. विभिन्न शोधपत्रों पर सम्मिलित रूप से २१ पुरस्कार प्राप्त. वर्तमान में भारत वर्ष के प्रथम एवं एकमात्र वृद्धावस्था मानसिक स्वास्थ्य विभाग, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ में आचार्य (प्रोफेसर) एवम् चिकित्सा मनोवैज्ञानिक के पद पर कार्यरत. https://kgmu.org/department_details.php?dept_type=2&dept_id=14&page_type=faculty_and_staff
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