रिनपास (Ranchi Institute of Neuropsychiatry and Allied Sciences, http://rinpas.nic.in/), रांची में अपने एम फिल (मेडिकल और सोसल सायकालोजी) dissertation के लिए मैंने वर्ष २००० में समर्पण लिखा था। मेरे dissertation की गाइड डॉ. मसरूर जहाँ थीं। टॉपिक था ,"Personality
Characteristics of Schizophrenic Patients with and without Criminal
History " . मैडम बड़े
मनोयोग से मेरी लिखी हुयी चीजें पढ़ती और correction करतीं। Correction पर करेक्शन होते गये, और अंततः dissertation का जो फाइनल रूप मेरे सामने आया, वो उससे
एकदम भिन्न था, जो मैं लिखकर देता था। उस समय मन में बड़ी कोफ़्त हुयी कि, जिंदगी की पहली थीसिस और इसमें अपने मन से
लिखा कुछ भी नहीं,
या तो
रिसर्चर्स की findings
या मैडम का
किया हुआ correction.
कुल मिलकर
एहसास हुआ कि सिर्फ Acknowledgement
और समर्पण ही
अपना हो सकता है। इसी अकुलाहट में ये समर्पण लिखा गया। उस समय अंतिम पद्य की प्रथम दो
पंक्तियाँ नही लिखी गयी थीं। ये पंक्तियाँ १२ वर्षों के पश्चात अपने PhD Thesis
में मैंने
जोड़ा और शीर्षक रखा 'समर्पण और आभार'। 'समर्पण और आभार' पढ़ने के लिए या मेरी अन्य कवितायें पढ़ने के लिए लिंक https://apnisochabhivyaktiapni.blogspot.com/2013/09/blog-post_16.html पर जाया जा सकता है। पीएचडी थीसिस मैने Dr. S. C. Tiwari Sir की guidance में वृद्धावस्था मानसिक स्वास्थ्य विभाग , किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (http://kgmu.org/) से किया । टॉपिक है ,"A Clinical
Psychological Study of Cognitive Functioning as a Determinant of Quality of Life
amongst Urban Elderlies ". मैं अपने दोनों गुरूजनों का कृतज्ञ हूँ
जिन्होंने मुझे इस लायक बनाया कि पहले मैं एक चिकित्सा मनोवैज्ञानिक बना और फिर चिकित्सा मनोविज्ञान में अध्यापक (http://kgmu.org/department_details.php?dept_type=2&dept_id=14&page_type=faculty_and_staff)। गुरु की वंदना में ये श्लोक जगप्रसिद्ध है मैं अपने गुरुजनों
की वंदना करता हूँ -
| With Dr. S. C. Tiwari |
गुरुर ब्रम्हा गुरुर विष्णु गुरुर देव महेश्वरः ,
गुरुर साक्षात् परमब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे
नमः।
![]() |
| With Dr. Masroor Jahan |
The most awaited moment of my life......
![]() |
| Doctor of Philosophy (Ph.D.) Degree Awarded on September 29, 2013, in the 9th Convocation of King George;s Medical University, Lucknow, India |


त्रिपाठी जी ढेर सारी बधाईयाँ
ReplyDeleteधन्यवाद गोविन्द जी। आप सब लोगों के सहयोग से संभव हो पाया।
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